देहरादून। उत्तराखंड में बीते कई दिनों से सियासी फेरबदल का खेल जारी है। जिसके चलते राज्य के सीएम और प्रदेश अध्यक्ष का फेरबदल कर अगले साल होने वाले चुनाव का बिगुल फूंक दिया है। वहीं बीजेपी सूत्रों की मानें तो अगले कुछ महीनों में प्रदेश में चल रही अंदरूनी गुटों की राजनीति पर लगाम लगाई जाएगी। इसके लिए आलाकमान ने शुक्रवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को हटाकर संकेत दे दिए।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को हटाने के बाद आला कमान ने साफ कर दिया है कि किसी भी तरह की गुटबाजी बर्दाश्त नहीं होगी। वहीं बीजेपी आलाकमान के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि उत्तराखंड में जिस वजह से फेरबदल हुआ है, उसकी मुख्य वजह है अगले साल होने वाले चुनावों में वापस सत्ता पाना है। इसलिए पार्टी अपने स्तर पर किसी भी तरीके की कोई कमी ही नहीं छोड़ना चाहती है। उन्होंने बताया कि आलाकमान के संज्ञान में पूरी जानकारी है कि उत्तराखंड में किस तरीके से बड़े नेताओं के अलग-अलग गुट बने हुए हैं। इन गुटों के बावजूद भी पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हो रही अंदरूनी राजनीति को रोक नहीं पाए। यही वजह रही कि उन्हें हटाने की पटकथा भी त्रिवेंद्र सिंह रावत के हटने के साथ ही शुरू हो गयी।
जिसके चलते अब भाजपा आला कमान जल्द ही कुछ और बड़े नेताओं के पर गाज गिराने की तैयारी में है। इसी कड़ी में अगले कुछ महीनों में उत्तराखंड बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे में भी फेरबदल भी किया जा सकता है। हालांकि यह पूरा फेरबदल जातीय समीकरण और स्थानीय समीकरण को देखते हुए किया जाएगा। वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को अगले 3-4 महीने के भीतर पार्टी में चल रही उठापटक को न सिर्फ शांत करना होगा बल्कि सबको साथ लेकर चलते हुए पूरी रणनीति बनानी होगी। इसके लिए तीरथ सिंह रावत को आलाकमान ने दिशा निर्देश भी दे दिए हैं।

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