नई दिल्ली। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से देश की जंग अभी भी जारी है जिसके चलते अब कई राज्य पाबंदियों पर ढील दे रहे है तो कई राज्य पाबंदिया बढ़ा रहे है। वहीं अब धीरे-धीरे संक्रमण भी नियंत्रण में आ रहा है,जिसके चलते अब 1 जून से मध्यप्रदेश में पाबंदियों पर ढ़ील मिल सकती है। वहीं दूसरी ओर, राजस्थान में कोरोना संक्रमण के हालात को देखते हुए लॉकडाउन बढ़ाया जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक राजस्थान में 31 मई या 10 जून तक लॉकडाउन बढ़ाने का निर्णय आज मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया जा सकता है।
आपको बता दें कि, राज्य सीएम अशोक गहलोत की अध्यक्षता में आज राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक होने जा रही है। इस दौरान बैठक में वैश्विक महामारी कोरोना के खतरे को लेकर चर्चा होगी। इस बैठक से पहले जहां मुख्यमंत्री ने लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने के संकेत दिए हैं तो वहीं विशेषज्ञों ने भी सख्त कदम जारी रखने की जरूरत बताई है। सीएम अशोक गहलोत ने शुक्रवार देर शाम कोर ग्रुप के साथ कोरोना से बने हालातों की समीक्षा की।
इस दौरान बैठक में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि जन अनुशासन पखवाड़ा, महामारी रेड अलर्ट जन अनुशासन पखवाड़ा और लॉकडाउन जैसे सख्त कदमों का असर अब दिखने लगा है। लेकिन संक्रमण की स्थिति और मृत्यु दर अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। ऐसे में हमें लॉकडाउन का और अधिक सख्ती से पालन करवाने के साथ सामाजिक व्यवहार में संयम और अनुशासन को लगातार बरकरार रखना होगा। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद प्रदेश में लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने की घोषणा हो सकती है। साथ ही कुछ सख्तियां और बढ़ई जा सकती हैं। बैठक में जिलों का दौरा कर रहे मंत्रियों से फीडबैक लेकर उसके आधार पर लॉकडाउन बढ़ाने का निर्णय होगा।
सख्ती जारी रखने की जरूरत
वहीं बैठक में चिकित्सा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने कहा कि संक्रमण की स्थिति को देखते हुए लॉकडाउन का पालन प्रदेश के हित में है। साथ ही बैठक में शामिल चिकित्सा विशेषज्ञों डॉ. राजाबाबू पंवार, डॉ. सुधीर भण्डारी और डॉ. वीरेन्द्र सिंह ने भी दूसरी और तीसरी लहर में ज्यादा अंतर की बात नहीं होने की बात कहते हुए लॉकडाउन जारी रखने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पहली लहर के बाद कोविड प्रोटोकॉल के पालन में लापरवाही हुई। हमें इसके अनुभव से सबक लेते हुए सख्त कदम जारी रखने होंगे।
बैठक में सीएम गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार ने संकट की इस घड़ी में लोगों का जीवन बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया। लेकिन शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी संक्रमण का काफी प्रसार हुआ है। युवा वर्ग, गर्भवती महिलाएं और बच्चे भी संक्रमण की चपेट में आए हैं। ऐसे में सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत बनाना है।
ऑक्सीजन का भरपूर स्टॉक तैयार
बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सैम्पलिंग बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही आगामी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर सीएचसी और पीएचसी स्तर पर चिकित्सा सुविधाओं को योजनाबद्ध ढंग से मजबूत किया जाएगा। वहीं मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने जानकारी दी कि मेडिकल ऑक्सीजन का बफर स्टॉक तैयार कर लिया गया है। स्थानीय स्तर पर भी ऑक्सीजन का उत्पादन बढ़ा है। उन्होंने कहा कि पहली और दूसरी लहर के अनुभवों से सबक लेते हुए तीसरी लहर के लिए योजना बनाई जा रही है।
बैठक में चिकित्सा सचिव सिद्धार्थ महाजन ने कहा कि डोर-टू-डोर सर्वे का पहला चरण पूरा हो गया है और दूसरे चरण में भी 60 प्रतिशत भाग कवर लिया गया है। उन्होंने बताया कि ब्लैक फंगस महामारी के इलाज के लिए गाइडलाइन जारी करने के साथ ही दरें तय कर दी गई हैं। इसके उपचार के लिए 20 अस्पताल चिन्हित किए गए हैं, साथ ही चिकित्सकों को उपचार और सर्जरी के लिए जरूरी ट्रेनिंग भी दे दी गई है।

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