वैश्विक महमारी कोरोना वायरस का यह दौर पूरे विश्व के लिए मुसीबतों से भरा हुआ है। जहां एक तरफ लोग जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे है वहीं दूसरी ओर चीन अपनी घटिया हरकतों से बाज नहीं आ रहा है और अपनी कमाई का कोई ज़रिया नहीं छोड़ रहा है। आपको बता दें कि, संकट के दौर में जहां लोग पैसों की किल्लत से जुंझ रहे है वहीं बहुत सारी चीनी कंपनियां लगातार अपने मेडिकल प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाती जा रही हैं। इतना ही नहीं बल्कि ये कंपनिया कोविड-19 में इस्तेमाल होने वाले उपकरण की क्वालिटी के साथ भी खिलवाड़ कर रही हैं।
वहीं मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चीनी कंपनियों ने कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के दाम तो बढ़ाए ही हैं, साथ क्वालिटी भी घटा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत के लिए बनाए जा रहे ऑक्सीजन कंसंट्रेटर में इस्तेमाल होने वाली चीज़ों की क्वालिटी से खिलवाड़ किया जा रहा है। चीनी कंपनिया कंसंट्रेटर की गुणवत्ता से समझौता कर रही है। अगर चीन ने अपनी ये करतूत बंद नहीं की तो भारत में मेडिकल तबाही आने की भी संभावना है।
आपको बता दें कि, बहुत सी कंपनियों ने बीते एक हफ्ते में 5 लीटर और 10 लीटर के ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के दाम बढ़ा दिए हैं। हालांकि इन दामों में ज़्यादा अंतर नहीं है, लेकिन लगातार इसकी कीमत बढ़ती ही जा रही है। वहीं बीजिंग, इस कंसंट्रेटर की सप्लाई को मानवता का काम कह रहा है। हालही में भारत में चीनी राजदूत सुन वेइदॉन्ग ने चीन के राहत प्रयासों के लिए ट्वीट किया था कि,”चीनी कंपनियां मानवीयता दिखा रही हैं। वो लोगों की जान बचाने की हर कोशिश कर रही हैं। भारतीय लोगों की इच्छाओं और ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए वो उन तक सुविधाएं पहुंचा रही हैं। ये उनकी सामाजिक ज़िम्मेदारी के साथ-साथ भारत को कोविड-19 से लड़ने में की गई मदद को दिखाता है। उन्होंने जो किया उसके लिए थम्स-अप।”
चीन का दूसरा चेहरा
चीन ने अपने आप को मानवीय ज़रूर ठहराया है लेकिन इसकी सच्चाई कुछ और ही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन की Yuwell नाम की एक कंपनी के बनाए हुए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की कीमत 30 अप्रैल तक 340 डॉलर, करीब 25 हज़ार रुपये तक थी। लेकिन कंपनी ने अचना से इसके दाम बढ़ा दिए जिसके बाद अब इस कंसंट्रेटर की कीमत 460 डॉलर यानी करीब 33 हज़ार 740 रुपये के करीब हो गई है। ये कंसंट्रेटर वो कंपनियां खरीदती हैं जो इसे भारत में कोविड-19 राहत के लिए दान देती हैं। लेकिन इनकी कीमतों में कोई भी रियायत नहीं दी जा रही है।
USISPF यानी यूएस इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम ने भारत को कोविड राहत के लिए एक लाख ऑक्सीजन कंसंट्रेटर देने का वादा किया है। आपको बता दें कि, ये ज़्यादातर चीन से ही खरीदे जा रहे हैं। USISPF के सीईओ डॉक्टर मुकेश अघी ने कहा कि, ”इस समय दुनिया के सामने स्वास्थ्य संकट उभर कर आया है, साथ ही ये भी समझ आया है कि क्यों किसी भी राष्ट्र को किसी एक देश पर मेडिकल डिवाइज़ के लिए डिपेंड नहीं होना चाहिए। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की मांग में अचानक बढ़ोत्तरी के बाद नाटकीय तरीके से इसके दामों में भी वृद्धि हो गई है। बहुत सी ज़रूरी चीज़ों की कमी के कारण खरीददारों को घटिया क्वालिटी के प्रोडक्ट खरीदने पड़ रहे हैं।”
बढ़ते दाम लेकिन घटिया क्वालिटी
एक भारतीय बिज़नेसमैन ने कहा कि अचानक मांग बढ़ने से इन मेडिकल उपकरणों की कीमतों में वृद्धि और क्वालिटी में कमी आई है. कई केस में तो ये भी देखा गया है कि कंपनियों ने अपने प्रोडक्ट का रेट तीन गुना से भी ज़्यादा बढ़ा दिया है। वहीं एक NGO के लिए इन कंसंट्रेटर की खऱीद करने वाले बिज़नेसमैन ने बताया कि इनकी कीमतों में इसलिए बढ़ोतरी हो रही है क्योंकि कच्चा माल बनाने वाली मैन्युफैक्चिरिंग कंपनियां इसकी लिमिटेड सप्लाई कर रही है। साथ ही धड़ल्ले से इसका लाभ उठा रही है। गौरतलब है कि, खरीददार इसके लिए अधिक से अधिक दाम दे रहे हैं। जिनसे कंपनियों को मुनाफा हो रहा है।
कई कंपनियों ने ऐसा भी किया है कि बुक किए गए ऑर्डर को कैंसिल कर दिया। उपकरणों के बढ़े हुए दामों का हवाला देते हुए उनके ऑर्डर कैंसिल कर दिये। वहीं एक भारतीय खरीददार ने बताया, ”बहुत सी कंपनियों ने अप्रैल महीनें में ऑक्सीजन कंस्टेटर की बुकिंग कर दी थी(पुराने दामों पर।) जिसके लिए एडवांस में कुछ पैसे भी जमा किए थे लेकिन बाद में उन्हें प्रोडक्ट डिलिवर ही नहीं किया गया। उल्टा कंपनियों ने उनसे बुक किए हुए ऑर्डर के लिए अधिक पैसा मांगना शुरू कर दिया। कुछ कंपनियों ने तो इन प्रोडक्ट्स के दाम दो-गुने और तीन-गुने कर दिये। साथ ही जिन खरीददारों ने अपना रिफंड वापिस चाहा, तो रिफंड के प्रोसेस को भी बहुत लंबा खींच दिया।”

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